Saturday, March 28, 2015

जियो ज़िन्दगी यारों भाग - २



इस कहानी के अगले भाग तक आते आते काफी समय लग गया। इसके लिए माफ़ी चाहता हूँ। 

अब आते हैं असली कहानी पर। 

उनकी पत्नी हमारे कैंपस में उनके एक दोस्त के यहां रुकी हुई थी। एक दिन मैं और मेरे सहकर्मी चाय पीने जा रहे थे।  शाम के करीब ४ बज रहे थे।  थोड़ी देर पहले  ही वो अपने दोस्त को देखकर हॉस्पिटल से आये थे।  अचानक उन्हें एक फ़ोन आया और उन्होंने तुरंत अपनी बाइक चालू की और भागे। मुझे तब तक पता नही चला जब तक वो ८ बजे मुझसे मिले। जो कुछ सुना मेरे दिमाग को सुन्न करने के लिए काफी था। 

उनके दोस्त की पत्नी ने हॉस्पिटल के पांचवी मंजिल से कूद के अपनी जान दे दी। उसी शाम उनके दोस्त ने हॉस्पिटल में अपनी आखरी सांस ली।  

कुछ समय के अंदर कितना कुछ बदल गया।  किसी ने अपना बेटा खोया तो किसी ने अपनी बेटी।  सबसे बड़ी बात कि किसी ने अपने माँ  बाप को खो दिया और उसे इस बात का पता तक नही है। 

पता नही आज वो बच्चा कहाँ होगा। किसके पास होगा। क्या उसे वो प्यार मिल रहा होगा जो उसे मिलना चाहिए था। 

उस पिता के अंदर क्या चल रहा होगा जिसने अपने बच्चे खोये।  काश कुछ ऐसा  जाता की वक़्त फिर से पलट जाता। वो अपने बच्चों को गले लगाके कह पाते कि वो उनसे कितना प्यार करते हैं। कम से कम एक ज़िन्दगी तो बच जाती। 

तो ऐसा क्या हो जाता है हमें कि हम उनके जीते जी वो नही कह पाते जो उनके खोने के बाद बोलना चाहते हैं। क्यों नही हम  उन्हें बता दे कि हम उनके कितना चाहते हैं। कितना प्यार करते हैं। 

 जो कुछ कहना चाहते हैं बोलिए। उसे खोने के बाद मत बोलिए क्यूंकि फिर उसकी कोई अहमियत नही रहती। उम्मीद है वो कुछ सीखेंगे जिन्हे ऐसी आदत है। बाकी आपकी मर्ज़ी। 

आपका 

आकाश 


Tuesday, December 9, 2014

जियो ज़िन्दगी यारों भाग - १

जो कहानी मैं लिखने जा रहा हूँ वो एक सच्ची घटना है। ये कहानी बताने के पीछे मेरा खास मकसद ये है कि मैं बताना चाहता हूँ कि आज को भरपूर ज़ीने की कोशिश कीजिए। कल के भरोसे जीना बंद कीजिये। 

ये कहानी है एक आदमी की या फिर यूँ कहूँ एक लड़के की। मैं उनके साथ अपने ऑफिस में काम कर चुका था।  ज़्यादा कुछ था नहीं हमारे बीच। बस दूर से हाय हेलो। मुझे ज़्यादा अच्छे नहीं लगते थे। उनका नाम पता नही क्यों, पर मैं बताना नहीं चाहता। कुछ दिनों के बाद उनकी पोस्टिंग दूसरी जगह आ गयी। किसी दूसरे से पता चला कि उन्होंने एक लड़की के साथ लव मैरेज कर लिया है और उनके इस फैसले से कोई भी खुश नहीं था,नाही लड़के के पिताजी ना  ही लड़की के परिवारवाले। हालांकि इससे उन्हें ज़्यादा कुछ फर्क नहीं पड़ा। दोनों अपनी ज़िन्दगी में काफी खुश थे। उनको एक बच्चे का सुख़ भी प्राप्त हुआ।  

अब कहानी की असली शुरुआत होती है। 

उनकी तबीयत अचानक ख़राब हो गयी। उन्हें बेहतर इलाज़ के लिए दिल्ली स्थित आर & आर  हॉस्पिटल भेजा गया। जाँच में पता चला कि उन्हें ब्लड कैंसर है और वो भी आखरी स्टेज पर है। मतलब बचने की  उम्मीद नहीं थी। मैं उस समय ऑफिस के कुछ काम से दिल्ली में ही था। पता चला तो बिलकुल अच्छा नहीं  लगा। पता है हम इंसानों की एक अच्छी खासियत क्या है? हमारे किसी के साथ कितने भी बुरे सम्बन्ध क्यूँ न हों ,ऐसा कुछ पता चलने पर दिल में एक टीस तो हो ही जाती है। लगता है कि ऐसा कुछ तो नहीं होना चाहिए था। 

फिर शुरू हुई एक नयी ज़ंग की। ज़िन्दगी और मौत के बीच। हालांकि इस जंग में जीत किसकी होगी ये पहले से तय था। पर इस कहानी की असली कहानी अभी बाकी थी। संयोग से उनके एक सहकर्मी मेरे साथ ही रहते थे और मुझे साड़ी जानकारी उनके द्वारा ही मिलती थी। ये सारी बातें हमें तब पता चलीं जब उन्हें हॉस्पिटल से एक फ़ोन आया कि उनके एक दोस्त की तबियत बहुत ज़्यादा ख़राब है और उन्हें हर दिन ब्लड  ज़रुरत है। फिर हमने कुछ ऐसे लोगों को खोजा जो हर दूसरे दिन अपने प्लेटलेट्स दे सकते थे। 

उनकी पत्नी हमेशा अपने पति के साथ हॉस्पिटल में ही रहती थी। उनके पिताजी,माताजी,सास,ससुर सब उनके पास थे। पर  क्या अब कुछ  सकता था ?


बाकी अगले भाग में। इस कहानी  आखरी बात बाकी है। 

आपका 

आकाश 

Friday, December 5, 2014

कितने खुशनसीब हैं हम भाग -2

पहला भाग ब्लॉग पर डालने से पहले मैंने बहुत सारे लोगों को अपना लेख पढ़ाया।शुक्र है कि उन्हें अच्छा लगा। तो अब बात करते हैं भाग 2 की।

तीसरी कहानी है एक ऐसी लड़की की जिनकी मम्मी कैंसर से पीड़ित हैं।हर महीने उन्हें हॉस्पिटल लेके जाना पड़ता है उनके इलाज़ के लिए।अगर आपसे कहा जाए कि आपके मम्मी या पापा को कैंसर है, आपको कैसा लगेगा? वो तो पिछले दो साल से ये देख रही है।आप अपने सामने दुनिया की सबसे अनमोल व्यक्ति को मौत के गर्त में जाते देखते हैं और आप कुछ नहीं कर सकते हैं।बस एक बुत्त की तरह बैठकर सब देखते रहते हैं और भगवान से एक एक दिन की मोहलत मांगते रहते हैं।क्या चलता होता उसके जेहन में ,या फिर उसके परिवार में, हम और आप बस अंदाज़ा लगाइये।

मैं ये नहीं कहता कि हमारे और आपके पास कोई प्रॉब्लम नहीं है।पर आप इस चीज़ को लेकर परेशान हैं कि आपके मोबाइल में ३जी नही है या फिर आपका बॉयफ्रेंड किसी दूसरी लड़की के साथ लंच कर रहा था।एक लड़की का उदाहरण बताता हूँ।वो बहुत परेशान लग रही थी।मैंने पूछा तो उसका जवाब था," वो अपने मोबाइल से परेशान है क्योंकि इसमें इंटरनेट तेज़ नहीं चलता। तो मैंने कहा कि ये मोबाइल का नही नेटवर्क का प्रॉब्लम है।तो उसने कहा उससे क्या, फिर भी उसे मोबाइल बदलना है और इस चीज़ को लेकर वो परेशान है। आप अगर इसे परेशानी कहेंगे तब तो भगवान् ही मालिक है, मेरे ख्याल से। 

आप चाहे माने या ना माने, मैं यकीनन मानता हूँ और मानता रहूँगा कि

"कितने खुशनसीब हैं हम"

आपका

आकाश